इसी तरह जिंदगी बस यूँ ही बसर करते चले आए।
अब इस आखरी पल भी सुनु तेरी पुकार नही जिंदगी तुझसे इतना लगाव तो नही ।
वो तो बस यह है की तेरे कारण किसी और को प्यार न करने पाये।
वरना कहानी कुछ औरभी हो सकती थी ।
अभी तो तू बस है शायद कीमती भी हो सकती थी .
रंग तेरी पसंद के तस्वीर मेरी पसंद की भी हो सकती थी ।
या शायद नही ,वरना जिंदगी प्यारी तो हो सकती थी ।
पर किसी तरह मेरी न हो सकती थी ।
मैंने तो चित्र बनाया जिंदगी का भी शायद मोहब्बत के रंग मौत से मिले ।
इसी आरजू-ऐ-ख्वाइश में रुखसत करता हूँ।
एक अधूरा बेरंग चित्र छोड़कर जो संजीदा मुकम्मल तस्वीर भी हो सकती थी ।
खेर जिंदगी तुझसे इतना लगाव भी नही ।
वो तो आदत हमारी ही थी दिल लगाने की और फिर चोट खाने की .
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