वो आये हमारे दर पर और कुछ इस तरह बोले "रद्दी वाले "
Wednesday, October 24, 2012
Sunday, November 15, 2009
zindgi
जिंदगी की हर फरमाइश पूरी करते चले आए।
इसी तरह जिंदगी बस यूँ ही बसर करते चले आए।
अब इस आखरी पल भी सुनु तेरी पुकार नही जिंदगी तुझसे इतना लगाव तो नही ।
वो तो बस यह है की तेरे कारण किसी और को प्यार न करने पाये।
इसी तरह जिंदगी बस यूँ ही बसर करते चले आए।
अब इस आखरी पल भी सुनु तेरी पुकार नही जिंदगी तुझसे इतना लगाव तो नही ।
वो तो बस यह है की तेरे कारण किसी और को प्यार न करने पाये।
वरना कहानी कुछ औरभी हो सकती थी ।
अभी तो तू बस है शायद कीमती भी हो सकती थी .
रंग तेरी पसंद के तस्वीर मेरी पसंद की भी हो सकती थी ।
या शायद नही ,वरना जिंदगी प्यारी तो हो सकती थी ।
पर किसी तरह मेरी न हो सकती थी ।
मैंने तो चित्र बनाया जिंदगी का भी शायद मोहब्बत के रंग मौत से मिले ।
इसी आरजू-ऐ-ख्वाइश में रुखसत करता हूँ।
एक अधूरा बेरंग चित्र छोड़कर जो संजीदा मुकम्मल तस्वीर भी हो सकती थी ।
खेर जिंदगी तुझसे इतना लगाव भी नही ।
वो तो आदत हमारी ही थी दिल लगाने की और फिर चोट खाने की .
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